Home दुनिया चीन के साथ संबंध “एक बुरा सपना” : किम जोंग उन

चीन के साथ संबंध “एक बुरा सपना” : किम जोंग उन

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तेज समाचार डेस्क
जब नॉर्थ कोरिया के सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी की बैठक हुई, तो लोगों को लगा कि तानाशाह किम जोंग उन पता नहीं क्या निर्णय लेंगे? क्या वो अमेरिका के नए राष्ट्रपति बाइडन को अपने आक्रामक तेवर दिखाएंगे? लेकिन विश्लेषकों को चौंकाते हुए किम जोंग उन ने न केवल चीन से अपने संबंधों पर ही प्रश्न चिन्ह लगाया, बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था के ह्रास पर चिंता भी जताई।
एक अप्रत्याशित बैठक में किम जोंग उन ने बताया, “पिछले पाँच वर्षों में उत्तरी कोरिया के साथ जितना कुछ हो चुका है, उससे बुरा कुछ भी नहीं हो सकता। हमारी आर्थिक विकास की योजना हर मोर्चे पर कमजोर रही है। हमें अपने नीतियों का पुनः निरीक्षण करना चाहिए”
अब आप सोच रहे होंगे, यह सूरज आखिर किस दिशा में उगा है? लेकिन ये तो मात्र शुरुआत थी, क्योंकि बातों ही बातों में किम जोंग उन ने अप्रत्यक्ष तौर पर चीन के साथ अपने संबंधों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जिन असंख्य चुनौतियों का हमें सामना करना पड़ रहा है, उनसे निपटने का एक ही तरीका है – हमें अपनी शक्तियों को बढ़ाना होगा, और अपनी आत्मनिर्भरता पर ध्यान देना होगा”
लेकिन ऐसा भी क्या हुआ कि किम का चीन से ऐसा मोहभंग हुआ? वैसे तो उत्तरी कोरिया कई चीजों के लिए वैश्विक सहायता पर निर्भर है, जिसमें से अधिकतम सहायता चीन से ही आती है। लेकिन वुहान वायरस की महामारी फैलते ही चीन ने उत्तर कोरिया को ऐसे अलग किया, जैसे चाय में से मक्खी। इतना ही नहीं, जिस तरह चीन अन्य देशों की क्षेत्रीय या समुद्री सीमाओं में घुसपैठ कर रहा था, उसी भांति चीन ने उत्तरी कोरिया तक के समुद्री क्षेत्र में घुसपैठ करने का प्रयास किया।
ऐसे में किम जोंग उन का वर्तमान सम्बोधन इस बात की ओर इशारा कर रहा था कि वे पश्चिमी देशों से सहायता चाहते हैं और वे उसके लिए कुछ भी करने को तैयार है। यदि आवश्यकता पड़ी, तो वह चीन को भी दुलत्ती मार देंगे।
लेकिन किम महोदय का यह मत परिवर्यूंतन ऐसे ही नहीं हुआ है। एक तो वुहान वायरस की महामारी, और ऊपर से चीन के दोगले स्वरूप ने किम को अन्य विकल्पों की ओर ध्यान देने पर विवश किया है। अक्टूबर में एक भावुक सम्बोधन देते हुए किम बोले, “मुझपे लोगों ने आँखें मूंदकर भरोसा किया, पर मैं उनकी आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाया। मैं इसके लिए शर्मिंदा हूँ और क्षमा भी माँगता हूँ” –
ऐसे में किम जोंग उन का वर्तमान संदेश इस बात की ओर इशारा करता है कि आखिर क्यों उत्तरी कोरिया चीन की चिकनी चुपड़ी बातों में अब यकीन नहीं कर सकता, और अब वह दुनिया के अन्य देशों के साथ नए सिरे से शुरुआत करना चाहता है।