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ओमान के सुल्तान का निधन, पिता को गद्दी से हटा कर आधी सदी तक किया राज

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नई दिल्ली (तेज समाचार डेस्क). ओमान के सुल्तान क़ाबूस बिन सईद अल सईद की 79 साल की उम्र में मौत हो गई है. क़ाबूस अरब जगत में सबसे ज़्यादा समय तक सुल्तान रहे.  क़ाबूस के चचेरे भाई हैयथम बिन तारिक़ अल सईद उनके उत्तराधिकारी बने हैं. क़ाबूस पिछले महीने बेल्जियम से अपना इलाज कराकर लौटे थे. मीडिया में ऐसी भी ख़बरे थीं कि उन्हें कैंसर है. रॉयल कोर्ट के दीवान ने शोक तथा तीन दिन तक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में आधिकारिक काम बंद करने तथा अगले 40 दिनों तक झंडा झुकाने की घोषणा की है. मीडिया के अनुसार, ओमान पर लगभग आधी सदी तक शासन करने वाले सुल्तान अविवाहित थे और उनका कोई वारिस या नामित उत्तराधिकारी नहीं था.
– 1970 में छीनी थी पिता से गद्दी
सुल्तान क़ाबूस 1970 में ब्रिटेन के समर्थन से अपने पिता को गद्दी से हटकार ख़ुद सुल्तान बने थे। लगभग पांच दशकों से सुल्तान क़ाबूस का ओमान की राजनीति पर वर्चस्व था. 29 साल की उम्र में वो अपने पिता को हटाकर राजगद्दी पर बैठे थे. उनके पिता सईद बिन तैमूर को एक अति-रूढ़िवादी शासक बताया जाता है. अपने पिता के बाद सुल्तान क़ाबूस ने तुरंत ये ऐलान किया कि वो एक आधुनिक सरकार चाहते हैं और तेल से आने वाले पैसे को देश के विकास पर लगाना चाहते हैं. उस वक़्त ओमान में सिर्फ़ 10 किमी. पक्की सड़क और तीन स्कूल थे. उन्होंने विदेशी मामलों में एक तटस्थ मार्ग अपनाया और 2013 में अमरीका और ईरान के बीच गुप्त वार्ता कराने में भी भूमिका निभाई. इसके दो साल बाद एक ऐतिहासिक परमाणु समझौता हुआ.
– ओमान का सर्वोच्च पद
सुल्तान ओमान में सर्वोच्च पद है और वह प्रधानमंत्री, सेना के सुप्रीम कमांडर, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री और विदेश मंत्री जैसे पद भी संभालता है. सुल्तान क़ाबूस शादीशुदा नहीं थे. ऐसे में सल्तनत के नियमों के मुताबिक़ तख़्त के ख़ाली रहने के तीन दिनों के अंदर शाही परिवार परिषद नया सुल्तान चुनना था. शाही परिवार परिषद में क़रीब 50 पुरुष सदस्य हैं.
– चचेरे भाई हैयथम ने शपथ ली
अब सरकार की ओर से जानकारी दी गई है कि हैयथम बिन तारिक़ अल सईद ने शाही परिवार परिषद से मुलाक़ात की और उसके बाद पद की शपथ ली. क़ाबूस के चचेरे भाई हैयथम देश के संस्कृति मंत्री थे. अगर परिवार की नए सुल्तान को लेकर सहमति नहीं बनती तो रक्षा परिषद के सदस्य, सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष, सलाहकार परिषद और राज्य परिषद उस बंद लिफ़ाफे को खोलते, जिसमें सुल्तान क़ाबूस ने नए सुल्तान को लेकर अपनी पसंद बताई थी. फिर उस शख़्स को नया सुल्तान बनाया जाता.

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