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सरपंच पद के लिए नाशिक में लगी 2 करोड़ की बोली

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नाशिक (तेज समाचार डेस्क). महाराष्ट्र ग्राम पंचायत चुनाव में राज्य के कुछ जिलों की ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए बोली लगाई जा रही है. सरपंच पद की नीलामी का मामला संज्ञान में आने के बाद राज्य चुनाव आयुक्त ने सोमवार को सभी जिलाधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है.
– नाशिक के उमराणे में सामने आया मामला
सरपंच पद की नीलामी का यह मामला तब सामने आया जब नासिक के उमराणे गांव में सरपंच पद के लिए दो करोड़ पांच लाख रुपए तक बोली लगाई गई. सरपंच की नीलामी यह प्रक्रिया गुप्त नहीं बल्कि श्री रामेश्वर महाराज मंदिर प्रांगण में संपन्न हुई. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
– 1 करोड़ 11 लाख से शुरू हुई बोली
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उमराणे गांव में सरपंच पद की नीलामी एक करोड़ 11 लाख से शुरू हुई और 2 करोड़ 5 लाख में पूरी हुई. पूर्व जिला परिषद सदस्य प्रशांत देवरे के पैनल के सुनील दत्तू देवरे को सरपंच पद पर जीत तय हुई. दरअसल, उमराणे गांव में प्याज बाजार समिति भी है.
– ग्राम विकास मंत्री ने ही की शिकायत
इसी तरह उत्तर महाराष्ट्र के नंदूरबार जिले के खोड़ामली गांव में भी सरपंच पद की नीलामी का मामला सुर्खियों में रहा.  राज्य में  सरपंच  पद की नीलामी की शिकायत खुद ग्राम विकास मंत्री हसन  मुश्रिफ  ने की है.
– चुनाव आयोग ने मांगी रिपोर्ट
मंत्री मुश्रिफ द्वारा मामले की शिकायत के बाद राज्य चुनाव आयुक्त  यूपीएस  मदान ने सोमवार को राज्य के सभी जिलाधिकारियों को ग्राम पंचायत चुनाव के संदर्भ में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है. यूपीएस  मदान ने कहा कि ग्राम पंचायत के चुनाव  निष्पक्ष  और पारदर्शी तरीके से होने चाहिए.  सरपंच  की नीलामी गंभीर मामला है.
– 15 जनवरी को मतदान, 18 जनवरी को परिणाम
महाराष्ट्र के 34 जिलों में 14 हजार 234 ग्राम पंचायतों के चुनाव हो रहे है. आगामी 15 जनवरी को पंचायत चुनावों के लिए मतदान होगा. जबकि 18 जनवरी को मतगणना होगी. हालांकि ये चुनाव 31 मार्च 2020 से पहले सम्पन्न कराए जाने थे लेकिन कोरोना महामारी के चलते चुनाव टल गया था.
– पैसे लेकर प्रशासक नियुक्ति की शिकायत
इन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार ने प्रशासक नियुक्त करने का फैसला किया था. भाजपा ने शिकायत की थी कि पैसे लेकर कार्यकर्ताओं को ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त किया जा रहा है.  वहीं,  समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी प्रशासक नियुक्त करने के खिलाफ आंदोलन की धमकी दी थी. प्रशासक की नियुक्ति विवादों में आने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा. हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारी को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश दिया था.