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अतीत के झरोखों से – हाशिमपुरा मामले का सच

Tez Samachar by Tez Samachar
May 22, 2018
in Featured, विविधा
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अतीत के झरोखों से – हाशिमपुरा मामले का सच
हापुड़ रोड पर गुलमर्ग सिनेमा के सामने हाशिमपुरा मोहल्ले में 22 मई 1987 को पुलिस, पीएसी और मिलिट्री ने सर्च अभियान चलाया था। इस ख्यातनाम हाशिमपुरा मामले का सच ब्यान कर रहे हैं जोधपुर के सुधांशु टाक जी  ! 

आज से ठीक 31 साल पहले । तारीख थी 22 मई 1987।पीएसी के प्लाटून कमांडर सुरिंदर पाल सिंह 19 जवानों के साथ मेरठ के हाशिमपुरा मोहल्ला पहुंचे।रमजान का महीना था । अलविदा की नमाज़ हो चुकी थी । राज्य सरकार के आदेश पर पुलिस ने पहले से करीब 644 लोगों को पकड़ रखा था । इनमें से हाशिमपुरा के 150 मुसलमान नौजवान थे। पुलिस ने इन्हें पीएसी के हवाले कर दिया गया। भीड़ में से औरतों और बच्चों को अलग कर घर भेज दिया गया।

देर रात्रि में प्रांतीय सशस्त्र बलों (पीएसी) का एक ट्रक नम्बर URU1493 रवाना हुआ। थ्री नॉट थ्री राइफल लिए 19 जवान दूर से ट्रक पर खड़े दिखाई दे रहे थे । जो नहीं दिख रहे थे वो थे ट्रक में सिर नीचे किए बैठे 50 मुस्लिम नौजवान । इनमें ज़्यादातर दिहाड़ी मजदूर और बुनकर थे।पुलिस की पिटाई में कुछ ने दम तोड़ दिया। बाकी बचे लोग ट्रक में इस तरह से बैठे थे कि दूर से दिखाई न पड़ें।

ट्रक मुरादनगर के गंगा ब्रिज पर पहुंचा और तीन लोगों को गोली मार कर नहर में फेंक दिया गया।जो बाकी बचे उन्हें अपनी नियति का अंदाज़ा लग चुका था । सबने ऊपर वाले को याद किया और हाथापाई करने की ‘आखिरी कोशिश’ की । जैसे ही मुस्लिम नौजवानों की भीड़ ने पीएसी के जवानों पर हमला किया, राइफल की गोलियों ने सब को भून दिया। लाशें नहर में ठिकाने लगा दी गईं। कुल 42 लोगों को मारा गया।

तब कांग्रेस पार्टी के राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे । जिनका कल जन्मदिन था । कांग्रेस के अनुसार दूरदर्शी, मिलनसार और नई सोच वाले युवा राजीव । वो राजीव जिनके लिए बड़े पेड़ के गिरने पर ज़मीन का हिलना एक सामान्य हलचल था । यूपी में कांग्रेस की ही सरकार थी । वरिष्ठ कांग्रेसी वीर बहादुर सिंह मुख्यमंत्री थे । 1986 में राम जन्मभूमि का ताला खुल चुका था और इसी के साथ ध्रुवीकरण की सियासत का वो चेन रिएक्शन शुरू हो चुका था जिस पर चलकर आगे बाबरी विध्वंस, मुंबई बम विस्फोट, बनारस और कानपुर के दंगों जैसी घटनाएं हुईं।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इन मुस्लिम युवकों का केस लड़ा भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने । देश के गृह मंत्री रहे पी चिदंबरम पर इस केस से जुड़ी सभी फाइलों को नष्ट करने का आरोप लगा । स्वामी ने चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट तक मे तलब करवा दिया ।

देश की बिकाऊ मीडिया आपको यह सब नही बताएगी । आज कितने अखबारों ने इस घटना पर आर्टिकल लिखे है? कितने चैनल्स ने कार्यक्रम बनाये है ?

कांग्रेसी राज में मुसलमानों पर हुए कांग्रेसी अत्याचारों को मोदी का डर दिखाकर दबा दिया जाता है । मोदी के मुख्यमंत्री रहते हुए गुजरात के एकमात्र दंगे को आधार बनाकर मुसलमानों का वोट पूरे देश मे बटोरा जा रहा है । क्या कांग्रेस , क्या सपा , क्या बसपा , क्या देवगौड़ा की जेडीएस और क्या लालू की राजद । सभी मुस्लिम वोटों का उपयोग कर उन्हें भ्रम में रखे हुए हैं । सबसे बड़े अपराधी यही है ।

भाजपा और मोदी ने समाज को , देश को एक सूत्र में रखने का प्रयास किया है । आप देखेंगे कि कई कट्टर हिन्दू , देश के नागरिक को प्रथम वरीयता देने के कारण खुलेआम मोदी को गालियां देते है । लेकिन मोदी के लिए राष्ट्र प्रथम है । इस देश का नागरिक प्रथम है ।चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान !!!!!!

– सुधांशु टाक 098280 32289

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