जामनेर(तेज़ समाचार के लिए नरेंद्र इंगले ):जैसे हि निगम के अम चुनावो का आगाज हुआ वैसे शहर के पुराने इलाको मे से अचानक बेबुनीयाद अस्वाभावीक प्रतीक्रियाए आने के मामले आरंभ हो गए है . कथित भावनात्मक विषय तो कही सोचीसमझी आपसी रंजीश की वारदाते आए दिन कोतवाली मे जमावडे के रूप मे देखी जाने लगी है . नगर का कांग नदी के कीनारो से सटा उत्तरी और पुर्वी-दक्षिनी छोर के कई नागरी इलाको का हिस्सा सामाजिक संरचना के मानक पर बिलकुल अलग और सांप्रदायीक तर्ज पर बेहद संवेदनशील है दुर्भाग्य से इन्ही इलाको से अनचाहि घटनाओ को अंजाम देने के लिए असामाजिक तत्वो द्वारा वहा के युवाओ के इस्तेमाल की कोशिशे तेज होती नजर आ रही है .
पुलिस प्रशासन इन सभी वारदातो को कीसी कथित मुकम्मल सुचनाओ के आधार पर कागजी खानापुर्ती तक कानूनी अमलीजामा पहनाने का अपना निर्धारीत काम करने तक सिमीत है . वही ऐसी घटनाओ मे अचानक आए उबाल से पनपने वाले उस खतरे की जवाबदेही कीस की होगी जिस से सार्वजनीक अमन भंग हो सकता है यह सवाल लोगो के दिलो मे डर की तरह बैठ सा गया है .
सामाजिक चिकीत्सको के मुताबीक मार्च 2018 मे होनेवाले निगम के आम चुनावो के मद्देनजर उक्त वारदातो को भेदनिती का प्रयोग बताया जा रहा है और इस प्रयोग मे सबसे शक्तीशाली पहलु की भुमीका मे होता है तत्काल उपलब्ध होने वाला तमाशबीनो का हुजूम . जो प्रशासन के लिए चुनौती बन जाता है . शहर का आपराधिक दर सरकारी फ़ाईलो मे शुन्य रहा है जो संदेहस्पद और अचरचभरा भी है . बावजुद संवेदनशीलता के चलते भेदनिती प्रभावी साबीत होती रही है . स्थिती को सदैव सहज बनाए रखने के लिए और पारदर्शी कानून व्यवस्था के प्रबंधन हेतु विदयमान विचारको एवम विभिन्न सामाजिक घटको के सहयोग से प्रशासनीक तत्परता की अपेक्षा जनता मे व्यक्त की जा रही है .


