धुलिया (वाहिद काकर ):शुक्रवार को धुलिया के तमाम बाजारों में रौनक रही . रमजान माह के आखिरी दिन ईद की पूर्व संध्या पर बाजारों में उमड़े खरीदार खूब खरीदारी हुई। ईद की सेंवइयों से लेकर श्रृंगार तक के सामानों की खूब बिक्री हुई .ईद को लेकर मुस्लिम समाज में भारी उत्साह है . ईद की पूर्व संध्या पर महिलाएं अपनी पसंद की चूड़ी, कंगन और नए-नए वस्त्र खरीदतीं नजर आईं जिस के शुक्रवार दिन और देर रात तक शहर के इलाकों में ईद की रौनक से बाजार गुलजार हुए हैं.

इस बार रमजान के महीने में पड़ने वाले रोजे शुरुआती तौर पर मुस्लिम भाइयों को तीखी गर्मी के बीच गुजारने पड़े लेकिन पिछले आठ दिन से जिले का मौसम मिला-जुला होने की वजह से रोजेदारों को ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा.
दिनभर लोगों की ओर से खरीदारी का सिलसिला चलता रहा। इस मौके पर मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में मौजूद सजे-धजे बाजारों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कई तरह के सामानों को खरीदा। इसमें कपड़े, टोपियों से लेकर बच्चों के लिए खिलौने शामिल हैं . चारों ओर फैली इत्र की खुशबू से खुशनुमा माहौल देखने को मिल रहा है। इस मौके पर महिलाओं ने कुर्तियां, सूट के साथ डिजाइनर गहनों की खूब खरीदारी की . बुजुर्ग भी ईद की खरीदारी में कोई कसर नहीं रहने देना चाहते। एक से बढ़कर एक पकवान और सेंवइयां और खजूर से सजे बाजारों में लोग ईद के इस मुबारक मौके पर सभी एक-दूसरे के साथ खुशियां बांट रहे हैं। इस ईद को ईद-उल-फितर भी कहते हैं. यह मीठी ईद हर बार खुशी का पैगाम लेकर आती है। मीठी ईद पर घर-घर में खुशियां मनाई जाती है। रमजान के इस महिने में पूरे माह खुदा की इबादत करने के बाद रमजान के महिने का समापन ईद के रूप में होता है जिसे ईद-उल-फितर कहा जाता है। महंगाई के बावजूद लोगों का उत्साह देखते बन रहा है .सिलाई की दुकान पर भी लोगों का काफी भीड़ देखी गई। वहीं टोपी, रूमाल, इत्र, सुरमा, जूते चप्पल, चूड़ी की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ी रही. आगरा रोड हो या मौलवीगंज सार्वजनिक अस्पताल मार्केट हर ओर पर्दानशीन महिलाओं व बच्चों का जमावड़ा दिखा. मेंहदी को लेकर भी महिलाओं में उत्साह है, बच्चे नए कपड़े, टोपी, जूते और रूमाल खरीदने की खुशी में मग्न रहे हैं .
ईद उल फितर त्योहार लोग मिलजुल कर धूमधाम से मनाते हैं। ईद के इस मुबारक मौके पर बुराइयों को खुद से दूर कर मोहब्बत और शांति को अपनाने की सीख दी जाती है. बाजार में खरीदारी के साथ लोग इस मौके पर निर्धन और जरूरतमंद लोगों की मदद भी करते हैं, जिसे जकात कहते हैं.
मुश्ताक हसन अंसारी

