पुणे (तेज समाचार डेस्क). पिंपरी चिंचवड़ समेत पुणे शहर में शनिवार की सुबह तब हड़कंप मच गया जब कर्नाटक पुलिस द्वारा गोवा – कर्नाटक बॉर्डर पर नाकाबन्दी के दौरान 4 लोगों को असलहों के साथ पकड़े जाने की खबर मिली. पूछताछ में इन लोगों ने कबूल किया कि वे लंकेश मैगजिन की सम्पादक गौरी लंकेश हत्याकांड में भी शामिल थे. पकड़े गए आरोपियों में पिंपरी-चिंचवड़ निवासी अमोल उर्फ भाईसाहब अरविंद काले (39) भी शामिल है. अमोल के सनातन और हिंदू जनजागृति समिति से भी जुड़े होने की जानकारी सामने आई है. हालांकि इन चारों की गिरफ्तारी 31 को गिरफ्तार हुई थी. पकड़े गए सभी आरोपियो को 11 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. इन चारों को मिला कर गौरी लंकेश मामले में कुल 5 गिरफ्तारियां हो चुकी है.
ज्ञात हो कि बैंगलुरु के आरआर नगर में 5 सितंबर 2017 को घर के सामने गोली मार कर गौरी लंकेश की हत्या कर दी गयी थी. कट्टर हिंदुवाद के विरोध में लिखने वाली गौरी लंकेश की हत्या देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है. इस हत्याकांड में आरोपी के. टी. नवीनकुमार के खिलाफ एसआईटी ने आरोपपत्र दाखिल किया था. इसके बाद मामले की जांच करते हुए अमोल काले उर्फ भाईसाहब उर्फ संजय भन्सारे (39, पुणे), अमित देगवेकर उर्फ प्रदीप महाजन (38), मनोहर येडावे उर्फ मनोज (28) सहित कुल पांच सनिग्धों को एसआईटी ने गिरफ्तार किया है. आरोपियों को 11 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.
पुलिस के मुताबिक, अमोल काले बीते 15 सालों से चिंचवड़ लिंक रोड पर माणिक कालोनी के अक्षय प्लाजा नामक सोसाइटी में अपने परिवार के साथ रहता है. पास पडौस के निवासियों के अनुसार अमोल यहां कभी-कभी ही आता था और हफ्ते-10 दिन से ज्यादा नहीं रुकता था.
ज्ञात हो कि, अमोल उर्फ भाईसाहब और उसके तीन साथियों को कर्नाटक पुलिस ने गोवा – कर्नाटक बॉर्डर पर नाकाबन्दी में असलहों के साथ पकड़ा था. पूछताछ में उनसे लेखक एस. भगवान की हत्या की साजिश रचने की जानकारी मिली. साथ ही पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या से भी जुड़े होने की जानकारी सामने आयी. आने के बाद 31 मई को एसआईटी ने सभी को गिरफ्तार कर लिया. अदालत ने उन्हें 11 जून तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है. इन चारों के पास 43 से ज्यादा मोबाइल सिम मिले हैं, साथ ही वे कई तरह की संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं.

