जामनेर (नरेंद्र इंगले ):सुबे मे तत्कालिन गठबंधन सरकार के कार्यकाल मे ग्रामिण इलाको मे बेहतर स्वास्थ सुविधा मुहैय्या कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने बीवीजी नामक निजी कंपनी द्वारा परीचालन के अनूबंध तहत हजारो की तादात मे मल्टि स्पेशालिटीस वैन्स खरीदी थी जिनकि हालत आज बेहद पतली दिखायी पड़ने लगी है . मेडीकल संसाधनो से लैस 108 के कारण सुबे के दुरदराज के देहातो मे रहने वाले लोगो को जहा फास्ट मेडीकल सुविधा उपलब्ध होने से बडी राहत महसुस हो रहि है वहि विभिन्न राजनितीक पार्टीयो के एम्बुलेन्स कम और चुनावी प्रचार रथ ज्यादा जैसे वाहनो को बडा आराम मिला है .
वहि अब शायद 108 के बिमार पड़ने के उदाहरणो के कारण फीर से पार्टीयो के एम्बुलेन्स के दिन पलटने के संकेत दिखायी पड़ने लगे है .तेज़ समाचार संवाददाता जब सुबे के सिंचायी और मेडीकल शिक्षा मंत्री गिरीश महाजन के निर्वाचन क्षेत्र के वाघारी जिला परीषद गुट मे बुरहानपुर राज्यमार्ग से सटे वाडीकिल्ला गांव पहुचे तब सेवा पुर्ती के बाद अस्पताल रवाना होती एक 108 सडक कीनारे बंद पडी दिखी जिसे स्टार्ट करने के लिए वैन के कर्मीयो समेत राहगिर धक्का मार रहे थे , काफी मशक्कत के बाद वैन की बैटरी ने करंट पकडा और इंजिन शुरु हो पाया . यहा कल्पना करने वाली बात यह थी की अगर वैन मे कोई एमरजेंसी वाला मरीज होता तो क्या होता ? सडक हादसे या प्रकृतिक आपदाओ समेत हार्ट अटैक , सांप बिच्छू का काटना जैसे या कोई अन्य स्वास्थ आपदा के लिए भरोसेमंद जलद यातायात के लिए 108 इस टोल फ्री नंबर से आम लोगो की पहचान बनी इस सुविधा के बारे मे सरकार और बीवीजी के बिच हुए तकनिकी अनूबंधीय बिंदूओ की समीक्षा करना प्रशासन के लिए इसलिए जरुरी हो गया है क्यो की सुत्रो के मुताबीक 15 साल से इस सेवा मे तत्पर गाडीयो ने अब जवाब देना शुरु कर दिया है . बहरहाल मानवीय दृष्टिकोण वाली भावना से ओतप्रोत 108 के कर्मीगण अतिदक्षता के समय वैन्स की खराबीयो को अपने अनूभव दांव पर लगाकर सुधार लेते है या वैकल्पीक तरीके से मरीज को अस्पताल पहुचाकर अपना दायित्व निभाने से नहि चूँकते . लेकीन सरकार की भी उतनी हि जवाबदेहि बनती है की 108 जैसी सर्वीसेज कभी बिमार न पडे .

