भुसावल. आज के तकनिक युग में लोग अंधश्रद्धा के बली बने के अनेक उदाहरण समाज के आ रहे हैं. फिर भी अज्ञानी मनुष्य के साथ सुशिक्षित मनुष्य भी अंधश्रद्धा का शिकार हो रहा हैं. अंधश्रद्धा को समाज से खत्म करने के लिए मनुष्य ने विज्ञान को साथ में लेना चाहिए, ऐसा प्रतिपादन उमवि सिनेट सदस्य प्रा. डा. के. जी. कोल्हे ने दादासाहेब देविदास नामदेव भोले महाविद्यालय में 27 सितंबर को सायन्स असोसिएशन समिती के उद्घाटन प्रसंगी किया. इससमय मंचपर कार्यक्रम के अध्यक्षस्थानपर महाविद्यालय के प्राचार्य डा. आर. पी. फालक, प्रा. डा. जी. पी. वाघुलदे आदी मान्यवर उपस्थित थे. आगे कहते हुए प्रा. डा. के.जी. कोल्हे ने कहा की, मनुष्य ने जीवन जिने के साथ विज्ञान का सकारात्म प्रयोग करना चाहिए. वैज्ञानिक दृष्टीकोन से अज्ञान एवं विज्ञान के बारे मे विविध बाते उन्होंने बताई. तथा विज्ञान शास्त्र एवं अध्यात्मिक शास्त्र का कैसा संबंध हैं. इसपर विद्यार्थियों को मार्गदर्शन किया. अज्ञान से ही समाज दृष्ट बाबाओं की संख्या में बढोत्तरी हुई हैं. इसे सुशिक्षित लोग भी शिकार हो रहे हैं. कार्यक्रम के अध्यक्ष प्राचार्य फालक ने कहा की, नए संधोधन से विज्ञानशास्त्र को मनुष्य को भौतिक सुविधा उपलबध हुए हैं. मनुष्य ने जीवन में समाज से अच्छे गुण लेना चाहिए एवं दुगूर्णा का त्याग करना चाहिए. कार्यक्रम का सूत्रसंचालन प्रा. माधुरी पाटील ने तथा प्रस्तावना प्रा. डा. डी. एस. राणे ने किया. कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रा. अनिल सावले, प्रा. डा. जे. बी. चव्हाण, डा. शोभा चौधरी, प्रा. संगिता धर्माधिकारी, प्रा. डा. आर. बी. ढाके, प्रा. एस. एस. पाटील, प्रा. एस. डी. चौधरी, प्रा. एन. जी. नेमाडे, प्रा. निर्मला वानखेडे, प्रा. आर. डी. भोले, प्रा. डा. आर. एम. सरोदे, प्रा. डा. एस. डी. चौधरी, दिपक महाजन आदि सहित शिक्षकेतर कर्मचारीयों ने परिश्रम लिया.

