बचपन में हमने पढ़ा था कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है. समाज में रहता है. फलता-फूलता है ...और यहीं मरता...
Read moreचक्रव्यूह: 'विकास' जैसे और कितने 'भस्मासुर'? पौराणिक काल में एक राक्षस को भगवान शंकर ने ऐसा वरदान दिया था कि...
Read moreबिल गेट्स जैसा बनाने का सपना हर कोई देखता है, लेकिन हर कोई उनके जैसा हो नहीं सकता। बिल गेट्स...
Read moreउम्मीद तो यही थी कि देश के सर्वशक्तिमान, जब लॉकडाउन में छठी बार देश के नाम संदेश देंगे, तो कोई...
Read moreजिन्दगी : योद्धा और ज्ञानी हम जो कोई भी कार्य करते हैं अपने स्वार्थ के लिए करते ...
Read moreबदलते दौर ने सिनेमा के साथ कलाकारों के इंट्रेस्ट को भी बदल दिया है। अब कलाकारों का रुझान कम...
Read moreजिन्दगी : मोह का बोझ अर्जुन को कृष्ण ने जब शिष्य के रूप में स्वीकार किया तब वे जानते थे की...
Read moreजहरीले सांपों को जब भी वर्षों दूध पिलाओगे, फुंकार उठेंगे वे विषधर फिर जहर से मारे जाओगे। जब-जब बौनी छिपकलियां...
Read moreये नया भारत है ,पलट के मारता है मैंने पहले भी लिखा है ,आज फिर कह रहा हूं।ये नया भारत...
Read moreभारतीय संस्कृति में किसी चीज के बारे में ज्ञान (आज )प्राप्तकरना अर्थात उस वस्तु या विचार को पूर्णरूप से आत्मसात कर...
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