पुणे (तेज समाचार डेस्क). लॉकडाउन-3 अब अपनी समाप्ति की ओर है, लेकिन लॉकडाउन का तीसरा चरण शुरू होते ही सरकारों की ओर लोगों को उनके घर पहुंचाने के प्रयास शुरू हो गए है.कुछ लोग पैदल ही अपने गांव, प्रदेशों की ओर चल पड़े है. इनमें कोई पैदल चल पड़ा, तो कोई अपने निजी वाहन से तो कोई जो वाहन मिला उससे ही अपने गांव की जा रहा है. पुणे की एक आईटी कंपनी में काम करनेवाले बेटे के साथ रह रहा एक व्यक्ति अपने इस बेटे के साथ अपनी मोपेड से ही कानपुर के लिए चल पड़ा. चार दिनों का 1300 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद इन दोनों पिता-पुत्र की हालत तो काफी खराब हो गई, लेकिन इनके चेहरे पर घर पहुंचने का सुकून भी देखने को मिला है.
– पुणे में दोनों का छिन गया था काम
कानपुर के आर्य नगर में किराए के मकान में राम प्रताप राणा का परिवार रहता है. वह एक नट बोल्ट बनाने वाली फैक्ट्री में काम करते हैं और उनका बेटा पुणे में आईटी कम्पनी से जुड़ा हुआ है. लॉकडाउन के दौरान दोनों पुणे में ही फंस गए. फैक्ट्री और कम्पनी में दोनों के पास काम नहीं बचा. वहां के खर्चे अलग कमर तोड़ रहे थे. लिहाजा दोनों ने ही घर वापसी का मन बना लिया. उन्होंने वहां के प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई मगर कोई निष्कर्ष नहीं निकला.
– पास लेकर और मेडिकल जांच करा कर चल पड़े घर की ओर
आखिरी में चार दिन पहले उन्हें एक पास मिला. इसके बाद दोनों ने वहां एक निजी डॉक्टर से अपना चेकअप कराया और उससे भी फिटनेस सर्टिफिकेट हासिल कर लिया. ट्रेन में टिकट नहीं और पास में कोई साधन भी नहीं. लिहाजा दोनों ही एक स्कूटी पर सवार होकर पुणे से कानपुर आने के लिए निकल पड़े. चार दिन के लम्बे और थकाने वाले सफर के बाद मंगलवार की सुबह वे मध्य प्रदेश के बॉर्डर तक पहुंच गए मगर वहां पर पुलिस ने इन्हें रोक लिया. दोनों ने बहुत समझाया, परमिशन का कागज दिखाए मगर पुलिस मानने को तैयार नहीं थी.
– मध्य प्रदेश में पुलिस ने रोका
आखिरी में थक-हारकर राम प्रताप राणा वहीं बैठ गए. पुणे से बहुत दूर आ चुके थे और कानपुर 300 किलोमीटर दूर था. मध्यप्रदेश के बार्डर पर रनजीत सिंह नाम के दरोगा की ड्यूटी लगी थी. दोनों को उस हाल में देख उनके अंदर मानवता जाग गई और उन्होंने दोनों को छोड़ने का मन बना लिया. हांलाकि उन्होंने दोनों को चेतावनी भी दी कि उन्होंने यह काम गलत किया है. आखिरकार साढ़े तीन घंटे बाद पुलिस ने उन्हें मध्यप्रदेश से आगे जाने दिया. इसके बाद उन्होंने अपनी स्कूटी से कानपुर तक का सफर तय किया और लगभग डेढ़ बजे दोनों अपने घर पहुंच सके.