• ABOUT US
  • DISCLAIMER
  • PRIVACY POLICY
  • TERMS & CONDITION
  • CONTACT US
  • ADVERTISE WITH US
  • तेज़ समाचार मराठी
Tezsamachar
  • Home
  • देश
  • दुनिया
  • प्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाईफस्टाईल
  • विविधा
No Result
View All Result
  • Home
  • देश
  • दुनिया
  • प्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाईफस्टाईल
  • विविधा
No Result
View All Result
Tezsamachar
No Result
View All Result

जिन्दगी : चुनाव का त्यौहार

Tez Samachar by Tez Samachar
April 13, 2019
in Featured, विविधा
0
Elections

Neera Bhasinअधिकतर देखा गया है या दूसरे शब्दों में इसे एक परम्परा भी कह सकते हैं की हम भारत वासिंयो के जीवन में त्योहारों का बड़ा महत्व है। भारत में  त्योहारों की झड़ी तो बारह महीने लगी रहती है।कई दिन   पहले से  इसकी तयारी शुरू हो जाती है। त्यौहार कहाँ मनाएं ,अपने ही घर मनाएं या गांव जा कर माता पिता और और गांव वालों के साथ मनाये कौन कौन सी  मिठाईंया बनेंगी नए कपडे कहाँ से और कब खरीदे जाएँगे -किसी किसी त्यौहार पर   तो जेवर या बर्तन आदि खरीदने की भी प्रथा है। कुल मिला कर देखें तो सभी त्यौहार सद्भावना और संस्कृति के प्रतीक हैं।

हर त्यौहार किसी न किसी आदर्श पर आधारित है जिसके अंतर्गत परिवार के लिए मंगल कामना व रिश्तों में संवेदना स्पष्ट दिखाई देती है। कुछ त्यौहार परिवार के साथ मनाये जाते हैं तो कुछ सामाजिक होते हैं जिसमे आपसी मन मुटाव को मिटा कर लोग एक दूसरे को गले लगा लेते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में भी सुबह सुबह मंदिरों से वैदिक मन्त्रों का सुनाई देना ,मस्जिदों से अजान ;गिरजा घरों से प्रार्थना और गुरद्वारों से सुनाई देते गुरुबाणी के शब्द -जन जन में जीवन का संचार करते हैं
व्यवस्थाएँ तो आज भी सभी वैसी ही हैं ,नीतिंया भी वही हैं ,मान्यताएँ भी वही हैं पर सब कुछ बदला बदला सा लगता है वातावरण मैं मन्त्र पूजा ,प्रभु के प्रति श्रद्धा धुंधलाती जा रही है हर क्रिया कलाप में भौतिकता और अहंकार बढ़ता जा रहा है मन्त्रों के स्थान पर षड्यंत्रों का प्रभाव बढ़ रहा है ,सद्भभावना के स्थान पर पारस्परिक वैमनस्य और मित्रता के स्थान पर शत्रुता के विचारों का विष समाज को खोखला करता जा रहा है। हमारी संस्कृति और समाज को एक नए “त्यौहार ” ने अपने विषाक्त और विकराल प्रभाव से वशीभूत कर लिया है। और ये है चुनाव का त्यौहार “
इसमें मंदिरों के ढोल मंजीरों के साथ प्रभु भक्ति के गीत नहीं गए जाते -इसमें तो एक दूसरे के चरित्र पर कीचड़ उछाला जाता है -अजीब है ये त्यौहार -मंदिर में या किसी अन्य धरम स्थल पर में प्रभु को एक फूल या एक दिया या फिर एक मोमबत्ती जला लेने से ही आत्मा को शांति का अनुभव होता है ,पर ये चुनावी त्यौहार इसमें तथगतित जीवित मूर्तिंयां जिनको एक घंटे भर के लिए स्थापित करना हो तो करोड़ों रूपये इनका सिंहासन सजाने में खर्च कर दिए जाते है हैं -मंदिरों में हाथ की अंजलि में ईश्वर के चरणामृत का दो बून्द जल और तुलसी दल का प्रसाद ग्रहण कर के आत्मतृप्ति हो जाती है पर इस चुनावी त्यौहार में  चरणमृत  की जगह   लोगों को भर भर के शराब  पिलाई जाती है ,और लोगों में प्रसाद की जगह  धन बाँट कर  वोट खरीदे जाते हैं इस आश्वासन के साथ की यदि नेता जी जीत गए कृपा जरूर बरसेगी। ये ऐसा त्यौहार है जहाँ धरम का कहीं पता नहीं और धर्म के नाम पर लोगों को भावनात्मक रूप से तोडा फोड़ा जा रहा है। करोड़ों रुपयों की लगत से बने ये क्षणभंगुर पंडाल जितनी  जल्दी जल्दी अपना स्थान बदल रहे हैं उससे भी कहीं अधिक तीव्रता से देश का पतन होता जा रहा है। सड़कें इमारतें ,झूठे बोल ,आपसी बढ़ते मन मुटाव ये देश के विकास का साधन नहीं हो सकते। “चुनावी त्यौहार “आम जनता के धन को लुटा कर अपनी निजी सम्पन्नता और ख़ुशी बटोर  रहे हैंजिससे भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति पर काले  बादल  गहराते जा रहे हैं. हमें  देश के लोगों का चरित्र निर्माण करना है न की अहंकार और लालच दिखा कर चरित्र का विनाश।
– नीरा भसीन- ( 9866716006 )
Previous Post

देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों में सुरक्षित पुनः प्रधानमंत्री बनाए जाने भामरे को सांसद निर्वाचित करें-रावल

Next Post

भामरे के माध्यम से मालेगांव सटाना में बड़े पैमाने पर विकास फंड उपलब्ध कराया – मंत्री भूसे

Next Post
subhash Bhamare

भामरे के माध्यम से मालेगांव सटाना में बड़े पैमाने पर विकास फंड उपलब्ध कराया - मंत्री भूसे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Disclaimer
  • Privacy
  • Advertisement
  • Contact Us

© 2026 JNews - Premium WordPress news & magazine theme by Jegtheme.

No Result
View All Result
  • Home
  • देश
  • दुनिया
  • प्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाईफस्टाईल
  • विविधा

© 2026 JNews - Premium WordPress news & magazine theme by Jegtheme.