कहावत तो यही है, ‘चोर-चोर मौसेरे भाई!’ लेकिन आजकल के सफेदपोशों के सामने चोर-उचक्के, बदमाश-गुंडे या कथित ‘भाई लोग’ बहुत बौने हो गए हैं. इन बड़े-बड़े सफेदपोशों की बराबरी अगर कोई कर सकता है, तो वे हैं ‘अंडरवर्ल्ड डॉन’ …यानि माफिया सरगना! कहते हैं ‘डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है!’ इस पर हमारा मानना है कि जब पकड़ने वाले ही डॉन से दोस्ती कर लेते हैं, उनसे मेलजोल बढ़ाते हैं, उनका सम्मान-सत्कार करते हैं, तो डॉन को पकड़ने की जरूरत ही क्या है? फिर बेचारे ये डॉन लोग ही इन बड़े-बड़े सफेदपोशों को अपना ‘गॉडफादर या माई-बाप’ मानते हैं, तब इनके सामने डॉन की औकात ही क्या होती है? यानि डॉन तो ‘छोटी मछली’ होती है और ये सफेदपोश ‘बड़े मगरमच्छ’!