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जब तक रहेगा समोसे में आलू…

Tez Samachar by Tez Samachar
June 23, 2017
in Featured, मनोरंजन
0
जब तक रहेगा समोसे में आलू…

राजनीति में एक व्यंगात्मक नारा उठा था.. की .. जब तक रहेगा समोसे में आलू.. इस व्यंग में आए समोसे शब्द के उल्लेख से ही मुँह में पानी आने लगता है.बारिश के मौसम में भीनी भीनी व जोरदार बारिश के बीच अनायास ही चटपटी वस्तुएं खाने के लिए मन ललचाता है । ऐसे में खास तौर से कचोरी व समोसा देश के किसी भी कौने में खाने वालों की पहली पसंद बन जाता है । यदि जलगांव शहर की बात करे तो अकेले शहर में लगभग दस हजार कचोरी समोसा आसानी से बिक जाता है । शायद देश भर में डोसा इडली की तुलना में समोसा कचोरी सबसे अधिक बिकने वाला पकवान होगा. खैर रिसर्च वा दाता कलेक्शन कंपनियाँ इस पर सर्वे कर सकती हैं लेकिन हम बात करते हैं समोसे कचोरी के उदगम की.

कचोरी व समोसा बनाने के लिए मैदे से छोटी छोटी लोई बनाते हुए स्वादिष्ट मसाला भरने से लेकर इसे सुनहरे रंग में तल कर ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराये जाने की एक प्रक्रिया स्वादिष्ट समोसा व कचोरी का निर्माण करती है । कचोरी के बारे मेेें मानना है कि, उत्तर भारत में कचोरी को कचौडी भी कहा जाता है । साधारणत: कचोरी  शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के कच शब्द से बताई जाती है । जिसके अंतर्गत संस्कृत भाषा में कच का अर्थ बांधना होता है । महाराष्ट्र में गणेशोत्सव पर बनने वाले लज्जतदार मोदक भी कचोरी वर्ग में आता है । प्राचीन काल में कचोरी को एक नियमित गोल आकार में न बनाते हुए भरी हुई पूरी या अन्य किसी आकार में बनाया जाता था । कचोरी के एक अन्य तिकोने स्वरूप में भरावन को कचोरी वर्ग में समोसे के रूप में जाना जाता है ।

भाषा विज्ञान के अंतर्गत संधिविच्छेद के रूप में कचोरी को कच धन पूरिका के रूप में भी कहा जाता है । बाद में इस शब्द का अपभ्रंश कचपूरिया  और फिर धीरे धीरे कचोरी केे रूप में परिवर्तित हो गया । इस कचपूरिया शब्द के अर्थ में पूरिया का अर्थ भरावन यां पदार्थ के भरे जाने से उद्दिष्ट होता है । समयानुसार कचोरी के कच शब्द को कुर कुरा एवं पूरिया शब्द को भरावन से जोडते हुए कुरकुरी पूरी के रूप में मान लिया गया । दक्षिण भारत में दाल आदि के भरावन के साथ कचोरी को, तो वही उत्तर भारत में विभिन्न मसालों, दालों, बेसन आदि के मिश्रण से भरावन के रूप में जाना जाता है । जबकि, राजस्थान एवं गुजरात परिसर में प्याज एवं अन्य व्यंजनों से बने भरावन वाली कचोरी का प्रसिद्ध रूप सामने आता है ।

देश में बिकने वाली अधिकांश कचौरी मूलत: उड़द की दाल की भरावन से ही बनती है । कचोरी व समोसे को लजीज व कुरकुरा बनाने के लिए मैदे में मोहन (पंजाबी भाषा में मोन) के रूप में घी, तेल आदि डाला जाता है । वैसे तो कचोरी और समोसा भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में बिकता व बनता है । किन्तू मूलत: व मुख्यत: यह उत्तर भारतीय पकवान ही है । ( विक्रांत राय जलगाँव से )

Tags: उत्तर भारतीय पकवानकचोरीगणेशोत्सवसमोसासमोसे में आलू
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