जलगांव. पहले के काल में जिसके पास सबसे जादा गोधन उसे आमीर माना जाता था. इसके अलावा खेत के लिए खाद भी मिलता था. लेकिन दुर्दैव से आज सभी तरफ दुध की कमी खल रही हैं. जरूरत के लिए बाहर से दुध मंगाना पड़ रहा हैं. दुध उत्पादन बढ़ाने की मांग ध्यान में रखते हुए शासकीय योजना एवं अनुदान का लाभ लेकर दुग्धव्यापर पर ध्यान देना चाहिए. गोधन से गांव में गतवैभव प्राप्त होकर रहेगा. ऐसा प्रतिपादन जिलाधिकारी किशोरराजे निंबालकर ने किया. अैग्रोवर्ल्ड व फार्मर्स मल्टिपर्पज असोसिएशन के विद्यमान से जलगाव में जिला नियोजन समिती के सभागृह में एकदिवसीय दुग्धव्यवसाय कार्यशाला का आयोजन किया गया था. उसमें अैग्रोवर्ल्ड प्रकाशीत -मुनाफे का दुग्धव्यवसाय- किताब का प्रकाशन मान्यवरों के हाथो किया गया. उस प्रसंगी जिलाधिकारी निंबाळकर कह रहे थे. मंच पर जिला परिषद पूर्व अध्यक्ष अैड. रवींद्र पाटील, कृषी उपसंचालक अनिल भोकरे, अैग्रोवर्ल्ड संचालक शैलेंद्र चव्हाण, द-लवाल कंपनी के मुख्य प्रक्षेत्र सल्लागार डा. रामराजे पाटील, पशुधन विकास अधिकारी डा. प्रशांत येवले, डा. नीलेश बारी, धुलिया के कृषी महाविद्यालय के सहाय्यक प्राध्यापक डा. धीरज कंखरे आदी उपस्थित थे. कार्यशाला को 450 प्रशिक्षणार्थी उपस्थित थे. डा. येवल ने दुध देने वाले गाय, म्हैस का चयन तथा जनावरों की बिमारी एवं टिकाकरण, डा. बारी ने दुध देनेवाले जनावरों का खाद्य, चारा व्यवस्थापन एवं शासकीय योजना के बारे में मार्गदर्शन किया. तथा द-लवाल कंपनी के डा. पाटील ने आधुनिक गोठा व्यवस्थापन एवं दुध निकालने के यंत्र के बारे में बताया. प्रा डा. कंखरे ने दुग्धप्रक्रीया के बारे में, ए.पी. कन्सल्टन्सी के अजय पाटीन ने बैंक प्रोजेक्ट रिपोर्ट सादर करके के बारे में मार्गदर्शन किया. अैग्रोवर्ल्ड संचालक चव्हाण ने प्रास्ताविक किया. दीपक राजपूत ने सूत्रसंचालन किया.

