हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी राज्य के ‘सफेदपोश बगुले’ सैलानियों (पर्यटकों) की तरह पिकनिक मनाने और ‘पार्टियों को पार्टी’ देने विदर्भ रुपी ‘सुसाइड जोन’ में पधारे और घूम-फिर कर उड़ गए. मात्र छह मंत्री होने के कारण इस महा-विकास आघाड़ी सरकार को हम अब ‘सहा-विकास आघाड़ी सरकार’ इसलिए भी कह सकते हैं, क्योंकि यह सिर्फ छह दिनों के लिए ही यहां आयी थी. यह उनकी मजबूरी का ‘मनोरंजन स्थल’ ही है, जहां किसान आत्महत्या से बुरी तरह भयाक्रांत ‘विदर्भ’ में चाहे-अनचाहे उन्हें आना ही पड़ता है. ऑरेंज सिटी की संतरामयी और पिछड़े विदर्भ की अभावग्रस्त /अकालपीड़ित जनता उनका बड़ी उम्मीदों से स्वागत तो करती है, किंतु हमारी आशाओं पर तब तुषारापात हो जाता है, जब ये ‘सफेदपोश बगुले’ केवल 5-6 दिनों में सैर-सपाटा करने के बाद ‘फुर्र’ से उड़ जाते हैं! …और जिस जनता की गाढ़ी कमाई (टैक्स) से ढाई-तीन सौ करोड़ के तमाशे का आयोजन होता है, वही हाथ मलते रह जाती है!