कोरोना-काल जारी है, …भीषण महामारी है. देश में 60 हजार रोगी हैं,… और उससे दोगुने भुक्तभोगी हैं. करीब 800 लोगों की गई जान है, …फिर भी मेरा भारत महान है. क्योंकि देश के हर कोने-कोने में ‘सेवालय’ खुले हुए हैं. कई लोग फोटो खिंचवाने, अपनी तस्वीरें चमकाने मानव-सेवा कर रहे हैं, तो कई समाजसेवी पुण्य कमाने के लिए तन-मन-धन-धान्य गरीबों-मजदूरों पर अर्पण-समर्पण कर रहे हैं. देश की आर्थिक हालत खराब है, …इसे सुधारने सरकार की नजर में शराब है! मुझे तो लगता था कि देश में एक ऐसी मजबूत सरकार है, जो सारी आपदाओं-विपत्तियों को पार कर लेगी. लेकिन अब लगता है कि हमें इस सरकार के भरोसे नहीं रहना चाहिए, क्योंकि यह खुद शराब और शराबियों के भरोसे है!