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कोरोना ने तोड़ी भारतीय बाजार की कमर!

Tez Samachar by Tez Samachar
March 21, 2020
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कोरोना ने तोड़ी भारतीय बाजार की कमर!

कोरोना ने तोड़ी भारतीय बाजार की कमर!

….. कई बड़े देशों की अर्थव्यवस्था चरमरागई
…… भारत को करीब 34.8 करोड़ डॉलर का नुकसान 
चीन के बुहान शहर से दुनिया के 125 देशों में फैल चुके जानलेवा कोरोना वायरस ने कई बड़े देशों की अर्थव्यवस्था को तोड़ दिया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती के समय कोरोना वायरस की एंट्री हुई है, जिसका असर दुनिया के साथ भारत पर भी पड़ा है। भारतीय बाजार को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया है। जिस समय चीन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के मामले में दुनिया के कमोडिटी बाजारों में अहम भूमिका निभा रहा था, लेकिन अब वह लड़खड़ा चुका है। वहीं संयुक्त राष्ट्र की कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवेलपमेंट (यूएनसीटीएडी) के मुताबिक कोरोना वायरस से प्रभावित दुनिया की 15 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक देश भारत भी है।
 विशेषज्ञों की माने तो चीन में उत्पादन की गिरावट का असर भारत के व्यापार पर पड़ा और इससे देश की अर्थव्यवस्था को करीब 34.8 करोड़ डॉलर तक का नुकसान झेलना का अनुमान है। भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़नेे की खबरों के बाद निवेशकों में भी घबराहट बढ़ी, जिसके बाद सभी ने अपने कदम पीछे खीचना ही उचित समझा। भारत की बेरोजगारी में तीव्र वृद्धि इसका प्रतिबिंब है जो 3 मार्च, 2020 के सीएमआईई के आंकलन के अनुसार 8 प्रतिशत तक रही, जो पिछले साल जनवरी के 6.1 प्रतिशत से अधिक है। एक तरफ देश में बेरोजगारी बढ़ रही है, तो दूसरी ओर जो कंपनियों थोड़ी बहुत ठीक काम कर रही थी, उनकी कमर कोरोना वायरस ने तोड़ दी। भारत में कई सेक्टर ऐसे है जिन्हे सीधे तौर पर नुकसान झेलना पड़ रहा है। भारत में मेडिकल, पर्यटन, मनोरंजन क्षेत्र के साथ ट्रांसपोर्ट रेलवे, विमानन सेवा के व्यवसाय में काफी गिरावट दर्ज की है। वहीं शेयर बाजार भी दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा है।
– सरकार ने संभाला मोर्चा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समय रहते अपने कैबिनेट मंत्रियों सहित अन्य विभागों को उचित दिशा-निर्देश दे दिये थे। जिसका असर यह रहा की, 130 करोड़ की आबादी वाले देश में अभी तक मौत का आंकड़ा दहाई तक नहीं पहुंचा है। हालांकि मोदी सरकार की सर्तकर्ता से यह संभव हो सका। भारत सरकार, देश की जनता को ये भरोसा दिला रही है कि उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं। लेकिन विपक्षी दलों ने कोरोना वायरस के भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव के बारे में सरकार से सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं।
– भारत की विकास दर में गिरावट 
भारतीय कंपनियों के सामने कोरोना का संकट और गहराने से नकदी का दबाव बढ़ गया है। चुकी यूएस फेडरल ने ब्याज दरों में कटौती करने से ब्रांड बाजार की तरफ निवेशक पहुंचे है। यूरोप के आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) ने भी 2020-21 में भारत की अर्थव्यवस्था के विकास की गति का पूर्वानुमान 1.1 प्रतिशत घटा दिया है। ओईसीडी ने पहले अनुमान लगाया था कि भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.2 प्रतिशत रहेगी, लेकिन अब उसने इसे कम करके 5.1 प्रतिशत कर दिया है। यहां तक कि चीन के 0.8 फीसदी से भी ख़राब है।
– वैश्विक अर्थव्यवस्था में 16 फीसदी भारत की हिस्सेदारी
वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन 2003 की सार्स महामारी के वक्त से ही अनिवार्य हिस्सा रहा है। चीन विश्व की फैक्ट्री के रूप में विकसित हुआ और आइफोन जैसे प्रॉडक्ट यहीं से निकलते हैं। साथ ही बहुत सी चीजों की यह मांग पैदा करता है। चीन का दावा है कि उसके पास हजारों-लाखों धनी उपभोक्ता हैं जो लग्जरी उत्पादों, पर्यटन और कारों पर खर्च करते हैं।
 एक अनुमान के तौर पर 2003 में वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन की हिस्सेदारी 4 फीसद थी, वहीं आज 2020 में यह करीब 16 फीसद तक पहुंच चुकी है। चीन में जब सार्स महामारी का प्रकोप फैला था, उस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था को 40 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा था। सार्स के चलते 8,098 लोग बीमार हुए थे और 774 मारे गए थे।
– भारत की टॉप- 10 कंपनियों में सर्वाधिक नुकसान
बाजार पूंजीकरण (एम कैप) के लिहाज से टॉप-10 घरेलू कंपनियों में से 6 का एमकैप 95,432.26 करोड़ रु घट गया है। भारत की टॉप- 10 कंपनियों में सबसे अधिक नुकसान में रिलायंस को हुआ है। एचडीएफसी बैंक के बाजार पूंजीकरण में इस दौरान 23,435 करोड़ रु की कमी आई और यह 6,22,109.94 करोड़ रु रहा। इसके अलावा बजाज फाइनेंस का बाजार मार्केट कैप 14,299.1 करोड़ रु घटकर 2,54,309.90 करोड़ रु रह गया। वहीं एचडीएफसी का एमकैप 11,625.3 करोड़ रुपये घटकर 3,65,214.59 करोड़ रु, आईसीआईसीआई बैंक का 6,325.67 करोड़ रु घटकर 3,14,705.23 करोड़ रु और भारती एयरटेल का बाजार पूंजीकरण 2,673.22 करोड़ रु घटकर 2,88,225.26 करोड़ रुपये रह गया सबसे ज्यादा लाभ में इस दौरान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) रही है।
– टीसीएस का बाजार पूंजीकरण
टीसीएस का बाजार पूंजीकरण 43,884.14 करोड़ रु बढ़कर 7,94,717.56 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसी तरह इंफोसिस का बाजार पूंजीकरण 3,364.34 करोड़ रुपये बढ़कर 3,14,821.60 करोड़ रुपये, हिंदुस्तान युनिलीवर लिमिटेड का 2,534.8 करोड़ रुपये बढ़कर 4,73,359.77 करोड़ रुपये और कोटक महिंद्रा बैंक का बाजार पूंजीकरण 2,447.7 करोड़ रुपये बढ़कर 3,12,168.86 करोड़ रुपये रहा. बाजार पूंजीकरण के हिसाब से रिलायंस इंडस्ट्रीज शीर्ष पर रही. इसके बाद टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान युनिलीवर, एचडीएफसी, इंफोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एयरटेल और बजाज फाइनेंस का स्थान रहा है।
– सर्जिकल मास्क, दस्ताने की रिकॉर्ड बिक्री 
भारत में जब से कोरोना वायरस के बचाव के लिए सर्जिकल मास्क और दस्ताने पहनने के लिए निर्देश जारी किए हैं। उसके बाद इन दोनों की बिक्री में अचानक से बढ़ोतरी दर्ज की है। जो मास्क 5 से 10 रूपए के बीच में आता था वह आज 70 से 100 रु तक, और बेहतर मास्क 200 से 400 रू तक बिक रहे है। इन दोनों चीजों को बनाने वाली कंपनियों को काफी मुनाफा हो रहा है। वो इनका अलग से उत्पादन करने में जुटी हुई हैं। ये केवल फार्मा कंपनियों की आमदनी का मामला नहीं है। किसी भी बुरे प्रभाव की एक मानवीय कीमत भी होती है। मेडिकल स्टोर में दवाओं की कमी हो रही है। देश के तमाम बड़े शहरों में केमिस्ट, सैनिटाइजर और मास्क के ऑर्डर तो दे रहे हैं, लेकिन उन्हें हफ्ते से महीने भर में माल की डिलिवरी नहीं मिल रही है। अब जब बहुत से भारतीय अपने यहां दवाएं, सैनिटाइजर और मास्क जमा कर रहे हैं, तो ये सामान अधिकतम खुदरा मूल्य से भी अधिक दाम पर बेचा जा रहा हैं।
– कहां पर कितना हुआ नुकसान
. (विमानन क्षेत्र ) 
भारत में कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा असर पर्यटन क्षेत्र पर पड़ा है। कोरोना के चलते देश के लोग विदेश नहीं जा रहे और विदेशी पर्यटक भारत नहीं आ पा रहे हैं। अब तक 15 हजार करोड़ रु के टिकट रद्द हो चुके हैं। विमानन कंपनियों के वैश्विक संगठन सीएपीए ने कहा कि अधिकांश विमानन कंपनियां कोरोना के कारण मई अंत तक दिवालिया हो सकती हैं। कंपनियों का नकदी भंडार खत्म हो रहा है, बड़े विमानों को परिचालन से बाहर किया जा रहा है, और परिचालन आधा से अधिक कम हो गया है। इंडिगो की दैनिक बुकिंग में 15 से 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है। कंपनी ने तिमाही परिणाम में गिरावट आने की आशंका जताई है।
. (इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट ) 
चीन से भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण का कुल 48 फीसदी आयात होता है। चीन में कोरोना महामारी फैलने से मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स गजट पर बिलकुल बंद पड़े है। अभी तक कई सौ करोड़ का नुकसान हो चुका है।
.( सिनेमा और मॉल ) 
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए कई राज्यों में सिनेमा हॉल, बड़े मॉल और छोटे-बड़े तीर्थ स्थलो को बंद कर दिए गए हैं। इससे सिनेमा जगत और मॉल को अब तक कई सौ करोड़ का नुकसान हो चुका है।
. (खाली पड़े होटल) 
देशभर के कई बड़े-छोटे होटल कारोबार पर भी कोरोना वायरस की वजह से घटा है। लोग घर से बाहर नहीं निकलने और बाहारी लोगों के नहीं आने से होटल कारोबार अब तक 50 फीसदी तक घटा है। इस सेक्टर को अब तक 27,300 करोड़ का नुकसान हुआ है।
. (कपड़ा उद्योग ) 
कपड़ा उद्योग भी कोरोना की चपेट में आ गया है। कारोबार 40 फीसदी तक घटा है। कपड़ा उद्योग को करीब 12,000 करोड़ के नुकसान का अनुमान है।
. (मुर्गीपालन उद्योग) 
कोरोना के चलते सबसे अधिक नुकसान मुर्गीपालन उद्योग को हुआ है। डर के मारे लोग चिकन नहीं खरीद रहे हैं। वहीं इस उद्योग को अब तक 4500 करोड़ का नुकसान हुआ है।
. (वाहन उद्योग ) 
भारत में वाहन उद्योग पहले से ही आर्थिक सुस्ती का शिकार था। अब कोरोना के संकट से ऑटो क्षेत्र की हालत बिगड़ती जा रही है। उद्योग पहले से ही मंदी के दौर से गुजर रहे थे और भविष्य को लेकर और भी आशंकित हैं। 2020 में ऑटो उत्पादन 8.3 फीसदी गिर सकता है।
– इन बातों का रखना होगा ध्यान
1, आर्थिक सुस्ती के दौर में आपात कोष बनाना जरूरी है। यह कोष इतना बड़ा होना चाहिए कि आपका कम से कम 6 महीने का खर्च इससे निकल जाए।
2, जब बाजार में अस्थिरता का माहौल हो तो फिजूलखर्ची को बिलकुल रोके देना ही विकल्प है। सिर्फ वहीं खर्च करें जो निहायत जरूरी हो, जैसे बच्चों का स्कूल और ट्यूशन फीस आदि।
3, सुस्ती के माहौल में ऐसी संपत्ति का चुनाव करना चाहिए, जो बाजार से कम प्रभावित होते हैं। शेयर की जगह बांड या छोटी बचत और एफडी में निवेश करना बेहतर है।
4, अगर आपने होम लोन, कार लोन या कोई अन्य बड़ी रकम का लोन लिया है तो आप भावी स्थितियों के हिसाब से उसकी मासिक किस्त चुकाने की चिंता करें।
5, अक्सर कठिन समय में निवेशक सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) को बंद कर देते हैं। इस समय एसआईपी निवेश लंबे समय में बहुत ऊंचा रिटर्न दे सकता है।
6, आर्थिक संकट के दौर में अगर आपके पास हेल्थ पॉलिसी नहीं है तो जरूर ले लें। आप हेल्थ पॉलिसी के दम पर इलाज के महंगे खर्च से आसानी से पार पा जाएंगे।

संदीप सिंह, नई दिल्ली

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