नई दिल्ली (तेज समाचार डेस्क). जीवन में रास्ते बदलते रहते है. कुछ लोग अच्छे रास्ते छोड़ कर बुरे रास्तों पर चलना शुरू कर देते हैं, तो कुछ लोग बुराई का रास्ता त्याग कर अच्छाई की राह पर चल पड़ते है. ऐसे ही एक शख्स है नजीर वाणी, जो कश्मीर में आतंकियों का साथ छोड़कर सेना में शामिल हुए थे और आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे. गणतंत्र दिवस समारोह में शहीद लांस नायक नजीर अहमद वानी को मरणोपरांत अशोक चक्र से नवाजा जाएगा. यह सम्मान गणतंत्र दिवस समारोह में उनके परिजनों को दिया जाएगा. पिछले साल नवंबर में शोपियां में मुठभेड़ के दौरान नजीर शहीद हो गए थे. इस ऑपरेशन में छह आतंकी मारे गए थे.
– आत्मसमर्पण कर सेना में शामिल हुए थे
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कुलगाम के चेकी अश्मुजी गांव में रहने वाले नजीर वानी कभी आतंकियों के साथ थे, लेकिन उन्होंने रास्ता बदला और 2004 में टेरिटोरियल आर्मी की 162वीं बटालियन में शामिल हो गए. शहादत के वक्त वे 34 राष्ट्रीय राइफल्स में थे.
– सेना मेडल से भी नवाजा गया था
शहीद वानी के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं. उन्होंने आतंकियों के खिलाफ कई ऑपरेशन में हिस्सा लिया. वीरता के लिए उन्हें 2007 और 2018 में सेना मेडल से भी नवाजा गया था. शहादत के बाद सेना के प्रवक्ता ने उन्हें सच्चा सैनिक बताया था.
– 5 कीर्ति और 12 शौर्य चक्र दिए जाएंगे
केंद्र सरकार की ओर से हर साल वीर सैनिकों को सम्मानित किया जाता है. इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर शहीद वानी के अलावा चार अफसरों और एक सैनिक को कीर्ति चक्र, वहीं 12 सैनिकों को शौर्य चक्र से नावाजा जाएगा.
– शहीद की पत्नी को नहीं पता क्या होता है अशोक चक्र
लांस नाइक वानी की पत्नी महजबीन ने न्यूज एजेंसी को बताया कि उन्हें दो दिन पहले तक नहीं पता था कि अशोक चक्र जैसा कोई पुरस्कार मौजूद है. हालांकि, उन्होंने पति को अवॉर्ड दिए जाने के ऐलान पर खुशी जताई. महजबीन अपने दो बच्चों के साथ कुलगाम जिले के चेकी अश्मुजी इलाके में रहती हैं. 26 जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उन्हें वानी का अशोक चक्र देंगे.

