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मालदीव ने दिखाई अपनी औकात, भारत की सहायता ठुकरा कर चीन को लगाया गले

Tez Samachar by Tez Samachar
August 10, 2018
in Featured, दुनिया
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मालदीव ने दिखाई अपनी औकात, भारत की सहायता ठुकरा कर चीन को लगाया गले

Maldives President Abdulla Yameen

कहा- अपने हेलिकॉप्टर-सैनिक वापस बुलाओ

नई दिल्ली (तेज समाचार डेस्क). एक वक्त था जब पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे मालदीव को भारत की ओर से पानी पहुंचाया गया. इसके अलावा भी भारत समय-समय पर मालदीव की मदद करता रहा है. लेकिन मानदीव ने भारत के इन एहसानों को भुलाकर चीन को गले लगाया है. मालदीव ने भारत से अपने सैन्य हेलिकॉप्टर और सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कहा है. भारत के दो हेलिकॉप्टर और करीब 50 सैनिक इस वक्त मालदीव में हैं. दोनों देशों के बीच एक समझौते के तहत उन्हें वहां भेजा गया था. हालांकि, जून में समझौता खत्म होने के बाद अब मालदीव के राजदूत ने भारतीय विदेश मंत्रालय से इन्हें वापस बुलाने के लिए कहा है. भारत के लिए मालदीव में ये सबसे बुरी स्थिति मानी जा रही है, क्योंकि चीन पहले ही वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं में बड़े स्तर पर निवेश कर पैठ बना चुका है.
– सुप्रीम कोर्ट ने दिया था राजनीतिक कैदियों को छोड़ने का आदेश
दरअसल, मालदीव में इसी साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को राजनीतिक बंदियों को छोड़ने का आदेश दिया था. मालदीव के मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने कोर्ट के आदेश को मानने से इनकार करते हुए वहां 15 दिन की इमरजेंसी लागू कर दी थी. इस राजनीतिक संकट में मालदीव के विपक्षी नेता और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भारत से सैन्य दखल की गुहार लगाई थी. भारत ने भी मालदीव के हालात पर चिंता जताई थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच विवाद पैदा हो गया.
– विदेश मंत्रालय की हर स्थिति पर पैनी नजर
मालदीव में अभी भारत के 50 सैन्यकर्मी हैं, जिनमें पायलट, मेंटेनेंस क्रू भी शामिल हैं. इनमें से कई लोगों की वीजा अवधि खत्म हो चुकी है, लेकिन नई दिल्ली ने अभी उन्हें वापस नहीं बुलाया है. भारतीय नौसेना के प्रवक्ता के मुताबिक, विदेश मंत्रालय इस स्थिति को संभालने में जुटा है.
– मालदीव की भारत के लिए अहमियत
सवा चार लाख की आबादी वाला मालदीव भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है. हिंद महासागर में होने की वजह से ये देश भारत के लिए बेहद अहम है. अब तक कोई भी देश हिंद महासागर में भारत के विरोध में नहीं खड़ा हुआ है. हालांकि बीते कुछ समय में चीन ने वन बेल्ट वन रोड परियोजना के तहत यहां निवेश करना शुरू किया है. 2011 तक चीन का मालदीव में कोई दूतावास भी नहीं था, लेकिन अब चीन वहां मिलिट्री बेस बनाने की तैयारी में है. दोनों देशों के बीच हालिया समय में कई व्यापार समझौते भी हुए हैं. माना जा रहा है कि चीन मालदीव के बहाने भारत को घेरना चाहता है. उसने श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर भी निवेश किया है.

Tags: #IndiaAbdullah yaminChinaIndian Army in MaldivMaldivMaldives President Abdulla Yameensupreme court
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