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पद्मनाभस्वामी मंदिर पर त्रावणकोर शाही परिवार के अधिकार मिले

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यह तस्वीर सेकुलर भारत में हमलों का सामना कर रहे हिंदू धर्म का प्रतीक है। गले मिल रहे ये लोग त्रावणकोर राजपरिवार के सदस्य हैं। जो सुप्रीम कोर्ट से पद्मनाभस्वामी मंदिर पर अपना अधिकार वापस मिलने की ख़ुशी में रो पड़े।

आपकी जानकारी के लिए केरल के भव्य पद्मनाभस्वामी मंदिर का पुनर्निर्माण 18वीं सदी में इसके मौजूदा स्वरूप में त्रावणकोर शाही परिवार ने कराया था, जिन्होंने 1947 में भारतीय संघ में विलय से पहले दक्षिणी केरल और उससे लगे तमिलनाडु के कुछ भागों पर शासन किया था।

यह मंदिर कभी इस इलाक़े की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि का स्त्रोत हुआ करता था। माना जाता है कि यह भारत का सबसे अमीर मंदिर है। कुछ साल पहले यह मंदिर तब चर्चा में आया था जब एक लाख करोड़ से अधिक का खजाना वहां मिला था। कहते हैं कि इससे कहीं अधिक वहां के तहखानों में बंद है। सन 2016 में यहां से 186 करोड़ रुपये का सोना चोरी भी हो गया था।

कहा जाता है कि 10 वीं शताब्दी में इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। हालांकि कहीं-कहीं इस मंदिर के 16वीं शताब्दी के होने का भी जिक्र है। लेकिन यह काफी साफ है कि 1750 में त्रावणकोर के एक योद्धा मार्तंड वर्मा ने आसपास के इलाकों को जीत कर इस मंदिर की संपदा बढ़ाई।

पहले मुग़लों और अंग्रेजों के हमलों से यह मंदिर बच गया, लेकिन आज़ादी के बाद अपने ही देश की सेकुलर सरकारों ने नोचना शुरू कर दिया। केरल की कॉंग्रेसी और कम्युनिस्ट सरकारों ने इस मंदिर को कब्जे में लेने के लिए अनेकों षड्यंत्र रचे। आखिर में सन 2011 में मंदिर राजपरिवार से छीन लिया गया।

सरकारी प्रतिनिधि बनाकर विधर्मियों को घुसाया गया। सबकी नज़र मंदिर के ख़ज़ाने पर थी। जैसा कि पूर्व में बताया है कि लगभग 200 करोड़ का सोना अब तक चोरी हो चुका है। जो बाक़ी बचा है उस पर भी केरल की कांग्रेस और वामपंथी सरकारों की गिद्धदृष्टि लगी हुई थी।

मंदिर के कई हिस्से मरम्मत के नाम पर तोड़ दिए गए। मंदिर की अर्थव्यवस्था से जुड़े लाखों-करोड़ों हिंदू अब छिटक चुके हैं। उन्हें एक बोरी चावल देकर ईसाई और मुस्लिम बनाया जा रहा है। आज़ादी के बाद हमें यही मिला है।

हिंदुओं का लगभग हर मंदिर सरकारों द्वारा लूटा जा रहा है। हिंदुओं का करोड़ों का चढ़ावा सेकुलरिज्म के नाम पर मस्जिदों और चर्च के खाते में जा रहा है। ऊपर से हमें ऊँच-नीच, उत्तर-दक्षिण, आर्य-द्रविड़ में बाँटकर कमजोर करने की साज़िशें हर दिन चल रही हैं।

आज सुप्रीम कोर्ट में एक छोटी सी लेकिन बहुत महत्वपूर्ण जीत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट का 31 जनवरी 2011 का वह आदेश आज सोमवार को रद्द कर दिया, जिसमें राज्य सरकार से ऐतिहासिक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की पूंजी और प्रबंधन का नियंत्रण लेने के लिए न्यास गठित करने को कहा गया था. शीर्ष न्यायालय ने केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रशासन में त्रावणकोर शाही परिवार के अधिकारों को बरकरार रखा.

मुझे विश्वास है कि महान हिंद स्वराज का शिवाजी का सपना पूरा करने में सुप्रीम कोर्ट की यह जीत मील का पत्थर साबित होगी।