पुणे (तेज समाचार डेस्क). अपनी ही गर्भवती मामी उषा समीर भोसले (28, उरली कांचन) की हत्या के आरोप में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी.पी. अग्रवाल ने रूपाली उत्तम खेडेकर ऊर्फ रूपाली बालासाहेब बोरकर (27) को आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है.
इस मामले में विष्णू बाजीराव भोसले (47) ने उरली कांचन पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील रमेश घोरपडे ने 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे. घटना की जांच उरली कांचन तत्कालीन पुलिस निरीक्षक के. टी. पवार ने किया. विशेष बात यह रही कि आरोपी महिला स्वयं पुलिस कर्मचारी थी और उसे कानून का ज्ञान था. इस मुकदमें से यह साबित हुआ है कि हत्या का कारण हालांकि स्पष्ट नहीं हो सका, फिर भी आरोपी को सजा मिल सकती है.