विविधा

जिन्दगी : अर्जुन तुम एक वीर योद्धा हो

 श्लोक --३ भावार्थ -हे पार्थ तू कायरता को  प्राप्त न हो।  यह तुझमें योग्य नहीं है। परन्तप (अर्थात शत्रुओं को तपाने वाले )! ह्रदय की तुच्छ दुर्बलता को...

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