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चक्रव्यूह: ‘गर्भवती हथिनी’ और दुष्ट ‘सफेद हाथी’…!

Tez Samachar by Tez Samachar
June 6, 2020
in Featured, विविधा
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चक्रव्यूह: ‘गर्भवती हथिनी’ और दुष्ट ‘सफेद हाथी’…!

केरल में हुई एक गर्भवती हथिनी की हत्या से आज मानवता शर्मसार है. मानवता तो तब भी शर्मसार हुई थी, जब देवराज इंद्र ने राक्षसराज हिरण्यकश्यपु के अजन्मे-पुत्र (प्रल्हाद) को महारानी कायदु के गर्भ में ही मारने का कुत्सित प्रयास किया था. यही मानवता द्वापर युग में भी तब शर्मसार हुई थी, जब अत्याचारी कंस ने अपनी बहन देवकी की संतान को गर्भ में ही मारने की योजना बनाई थी, ताकि उसकी आठवीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म ही ना हो सके! आज भी हमारे आधुनिक समाज में गर्भवती स्त्री को या उसके गर्भ में पल रहे शिशु को मार देना अथवा मरवा देना कोई नई बात नहीं है. अर्थात प्राचीन काल से चली आ रही यह परंपरा निंदनीय है, घातक है. स्वस्थ और सभ्य समाज के लिए इसका विरोध होना आवश्यक है.
केरल एक सुशिक्षित राज्य है, जहां की साक्षरता दर 96 प्रतिशत है, लेकिन एक बेबस गर्भवती हथिनी की बर्बर हत्या के बाद यहां की मानवता दर ‘शून्य’ प्रतिशत पर आ गई लगती है. यहां के पलक्कड़ जिले में उक्त हथिनी को किसी दुष्ट ने बम-भरा अनानस खिला दिया, जो उसके मुंह में फट पड़ा! उसका मुंह और जीभ पूरी तरह चोटिल हो गयी, जिससे चार-पांच दिनों तक वह कुछ खा-पी नहीं सकी. भूख और दर्द से तड़पती हुई यह गर्भवती हथिनी पानी की खोज में एक नदी तट पर जा पहुंची और वहीं फंस गयी. वन विभाग के कर्मचारियों ने उसे पानी से बाहर निकालने के बहुत प्रयास किए, लेकिन वे नाकाम रहे. आखिरकार दर्द से बिलबिलाती हुई हथिनी ने अपने गर्भ समेत दम तोड़ दिया. देश भर में इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की गयीं.
बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज इस दर्दनाक घटना पर शोक प्रकट करने लगे. ऐसे में सफेदपोशों की जमात भी मैदान में उतर गई. कुछ दुष्ट ‘सफेद हाथियों’ ने इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की. उनके अनुसार यह घटना मल्लपुरम जैसे अल्पसंख्यक बहुल जिले में हुई थी, जबकि यह घटना पलक्कड़ जैसे बहुसंख्यक आबादी वाले जिले में हुई. जिन सफेद हाथियों ने गर्भवती हथिनी की हत्या को भारतीय संस्कृति से जोड़कर शोक प्रकट किया, उन्हें इंद्र और कंस की कहानी शायद याद नहीं होगी! इसका यह अर्थ नहीं कि हथिनी की बम-पटाखे खिलाकर की गई हत्या को हम जायज ठहरा रहे हैं! यह पाप है, जो केरल में हो चुका है. हर स्तर पर इसकी निंदा और विरोध होना ही चाहिए.
देशभर में फूटे गुस्से को देखते हुए केरल सरकार ने हथिनी के हत्यारों को पकड़ने के लिए कमर कसी. कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ हुई और तब विल्सन नामक एक शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बावजूद ‘सांप्रदायिक सफेद हाथी’ बाज नहीं आए और उन्होंने मोहम्मद अमजद अली और तमीम शेख नामक शख्स के गिरफ्तार होने की झूठी खबर सोशल मीडिया पर फैला दी. साफ है कि दोनों मुस्लिम शख्सों का नाम कोरोना-काल में भी सांप्रदायिक तनाव भड़काने के इरादे से फैलाया गया. वह तो भला हो कि देश की समझदार जनता इन दुष्ट सफेद हाथियों के बहकावे में नहीं आयी. इसके बावजूद इसी गोत्र की एक बड़ी नेता ने झूठा दावा किया कि केरल में हर साल 600 हाथी मारे जाते हैं! इस झूठ पर उनके खिलाफ केरल में एफआईआर भी दर्ज की गयी.
अब कुछ सवाल. पटाखे वाला अनानस गर्भवती हथिनी को क्यों खिलाया गया? क्या इसे खिलाकर वे दुष्ट हत्यारे कोई खतरनाक टेस्टिंग कर रहे थे? अर्थात जो बम-पटाखा हथिनी के जबड़े फाड़ सकता है, वह बड़े धमाके से बहुतों की जान भी ले सकता है. तात्पर्य यह कि इस हथिनी-हत्याकांड की उच्चस्तरीय गहरी जांच-पड़ताल होनी चाहिए. यहां यह भी सवाल उठता है कि पलक्कड़ की घटना को ‘मल्लपुरम’ से क्यों जोड़ा गया? क्या सिर्फ इसलिए कि यह आतंकी संगठन ‘आईएस’ का गढ़ रहा है? उधर, खून के आंसू रोते हुए मृत हुई गर्भवती हथिनी की आत्मा, अपने हत्यारों सहित उन ‘दुष्ट सफेद हाथियों’ को भी कभी माफ नहीं करेगी, जिन्होंने उसकी मौत पर भी राजनीति करने की कोशिश की. कोरोना से तो फिर भी बच सकते हैं हम, …लेकिन इन दुष्ट ‘सफेद हाथियों’ से हमें कौन बचाएगा?
(संपर्क : 9689926102)
Tags: chakravyuh-pregnant-hathini-and-wicked-white-elephant
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