केरल में हुई एक गर्भवती हथिनी की हत्या से आज मानवता शर्मसार है. मानवता तो तब भी शर्मसार हुई थी, जब देवराज इंद्र ने राक्षसराज हिरण्यकश्यपु के अजन्मे-पुत्र (प्रल्हाद) को महारानी कायदु के गर्भ में ही मारने का कुत्सित प्रयास किया था. यही मानवता द्वापर युग में भी तब शर्मसार हुई थी, जब अत्याचारी कंस ने अपनी बहन देवकी की संतान को गर्भ में ही मारने की योजना बनाई थी, ताकि उसकी आठवीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म ही ना हो सके! आज भी हमारे आधुनिक समाज में गर्भवती स्त्री को या उसके गर्भ में पल रहे शिशु को मार देना अथवा मरवा देना कोई नई बात नहीं है. अर्थात प्राचीन काल से चली आ रही यह परंपरा निंदनीय है, घातक है. स्वस्थ और सभ्य समाज के लिए इसका विरोध होना आवश्यक है.