सांख्य दर्शन के पांचवें श्लोक में कहा गया है -----सांसारिक साधनों और उपलब्धियों --राज्य ,धन ,स्त्री ,भवन आदि सभी से 'मोक्ष...
Read moreकुरुक्षेत्र में अर्जुन को भी अपने कर्म अर्थात कर्तव्य का ज्ञान था जो एक क्षत्रिय होने के नाते...
Read moreश्लोक 40 -- अध्याय 2 भावार्थ --इस ( कर्मयोग ) में आरम्भ ( किये हुए कर्म ) का नाश नहीं...
Read moreपवन तिवारी की नयी कृति "त्यागमूर्ति हिडिम्बा" इन दिनों चर्चा में है।इससे पहले इस पर नरेंद्र कोहली लिख चुके हैं।...
Read moreश्लोक - 39 ,अध्याय 2 भावार्थ --हे पार्थ ! यह (सम )बुद्धि तुझे सांख्य (अर्थात ज्ञान योग ) के विषय में कही...
Read moreकोरोना के प्रति शासन, प्रशासन और आम जनता की लापरवाही के परिणाम अत्यंत भयावह रूप लेते दिखाई दे रहे हैं।...
Read moreश्लोक -37 अध्ययाय 2 . भावार्थ --- तू (यदि युद्ध में ) मारा गया तो स्वर्ग को...
Read more" दिवाली पूजा का अद्भुत रहस्य " हर वर्ष दिवाली के शुभ अवसर पर...
Read moreश्री कृष्ण बार बार एक ही बात अर्जुन को समझा रहे हैं की 'सच 'न तो बदला...
Read moreहे भरतवंशी !समस्त प्राणी जन्म से पहले अप्रगट रहते हैं ,बीच में (अर्थात स्तिथिकाल में )प्रगट होते हैं ,और मरने के...
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